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गाँव का गौरववां25एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा दृश्य

इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा था कि सांस रुक गई। ग्रे शर्ट वाले लड़के का धैर्य देखकर हैरानी हुई। सामने वाला चिल्ला रहा था लेकिन वह शांत रहा। कागज फाड़ने वाला पल बहुत संतोषजनक था। गाँव का गौरव जैसे शो में ऐसे ड्रामे देखने को मिलते हैं। एक्टिंग बहुत नेचुरल लग रही थी। हर किसी के चेहरे पर असली दर्द साफ दिख रहा था। मुझे यह सीन बहुत पसंद आया।

परिवार की मजबूरी

बूढ़े दंपत्ति की हालत देखकर दिल दुख गया। मां गिड़गिड़ा रही थी और पिताजी मजबूरी में साइन कर रहे थे। परिवार के दबाव को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। गर्भवती महिला भी डरी हुई थी। गाँव का गौरव की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है। ऐसे सीन देखकर लगता है कि जीवन कितना कठिन हो सकता है। अभिनेताओं ने अपने किरदार को जीवंत कर दिया है।

हीरो की दहाड़

हीरो की एंट्री और उसका अंदाज लाजवाब था। उसने बिना कुछ कहे सबको चुप करा दिया। जब उसने वह एग्रीमेंट फाड़ा तो मजा आ गया। सामने वाले का चेहरा देखने लायक था। गाँव का गौरव में ऐसे हीरो की जरूरत होती है जो सच के लिए लड़े। मुझे यह किरदार बहुत प्रभावशाली लगा। उसकी आंखों में गुस्सा साफ झलक रहा था। नेटशॉर्ट पर ऐसे वीडियो देखना बहुत अच्छा लगता है।

कहानी का ट्विस्ट

कहानी में यह मोड़ बिल्कुल अप्रत्याशित था। सबको लगा कि बूढ़े आदमी ने हार मान ली है। लेकिन असली खेल तो बाद में शुरू हुआ। कागज पर साइन करना मजबूरी थी या कोई चाल? गाँव का गौरव के दर्शक इसका जवाब जानने के लिए बेताब होंगे। हर फ्रेम में कुछ नया खुलासा हो रहा था। डायलॉग बहुत तेज और प्रभावशाली थे। मुझे अगला एपिसोड देखने की जल्दी है।

विलेन का प्रदर्शन

विलेन का किरदार निभाने वाले अभिनेता ने कमाल कर दिया। उसकी आंखों में नफरत साफ दिख रही थी। वह बार बार चिल्ला रहा था और दूसरे को धमका रहा था। लेकिन अंत में उसकी करनी सबके सामने आ गई। गाँव का गौरव जैसे शो में ऐसे विलेन जरूरी होते हैं। उन्होंने कहानी में जान डाल दी है। मुझे उनकी एक्टिंग थोड़ी ज्यादा लगी लेकिन सीन के हिसाब से ठीक था।

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