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गाँव का गौरववां18एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

रात का सन्नाटा और आँसू

रात का सन्नाटा और चाँदनी बहुत खूबसूरत थी। उस बूढ़े व्यक्ति की आँखों में आँसू देखकर दिल भर आया। गाँव का गौरव नामक इस शो ने दिल छू लिया। पिता का प्यार शब्दों से परे है। खिड़की से झांकने का तरीका बहुत दर्दनाक था। वो अपने बेटे को देख रहा था। बिना जगाए वो चला गया। रात बहुत शांत थी।

ईंटों का रहस्य

ईंटें और पैसों का बदलाव बहुत रहस्यमयी था। क्या वो चोरी कर रहा था या कुछ और? कहानी में गहराई है। नेटशॉर्ट पर देखने का मज़ा आ गया। हर सीन में सस्पेंस बना रहा। थैले को बांधने का तरीका बहुत सावधानी से दिखाया गया। लाल धागे से बांधा था। हाथ कांप रहे थे।

पिता का त्याग

सोते हुए परिवार को देखने का तरीका बहुत इमोशनल था। बिना आवाज़ किए वो चला गया। गाँव का गौरव की कहानी सादगी में भी दमदार है। ऐसे पिता हर किसी के पास नहीं होते। कमरे का माहौल बहुत ठंडा था। दीये की रोशनी थी। हवा चल रही थी।

पुराने ज़माने की याद

पुराना कैलेंडर और रेडियो ने नॉस्टल्जिया दिया। १९९० का दौर याद आ गया। सेट डिज़ाइन बहुत असली लगा। कलाकारों की एक्टिंग लाजवाब थी। मैं पूरी रात यही देखता रहा। दीवारों की दरारें भी कहानी कहती हैं। पुरानी घड़ी भी थी। समय रुका हुआ था।

पैसों की गड्डियां

थैले में ईंटें रखने वाला सीन दिमाग घुमा देने वाला था। वजह क्या होगी? गाँव का गौरव में ऐसे ट्विस्ट बहुत हैं। मैं अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूँ। कहानी बहुत आगे बढ़ गई है। पैसों की गड्डियां भी दिखीं। नोट लाल रंग के थे। बहुत सारे थे।

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