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गाँव का गौरववां17एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

भावुक मिलन का पल

दादी और पोते का गले मिलना बहुत भावुक था। आँसू देखकर दिल भर आया। गाँव का गौरव में ऐसे पल बार-बार याद आते हैं। पुराने घर की रोशनी में उनका रिश्ता साफ दिखता है। हर डायलॉग में दर्द है। पैसे देते वक्त दादी की खुशी और चिंता दोनों साफ झलक रही थी। यह दृश्य जीवन की कठिन सच्चाई को बहुत खूबसूरती से दिखाता है। पोते की आँखों में भी नमी थी। सच्चाई बहुत कड़वी है।

पुराने अखबार का रहस्य

पुराने अखबार वाला सीन बहुत गहरा था। शायद कोई पुरानी कहानी छिपी है। गाँव का गौरव की कहानी धीरे धीरे खुल रही है। पोता कुछ छिपा रहा है जो बाद में बड़ा मोड़ देगा। बिस्तर के नीचे बैग रखना संदेह पैदा करता है। रात का अंधेरा और मोमबत्ती की रोशनी माहौल बनाती है। दीवारों पर लगी तस्वीरें भी कुछ कहती हैं। समय बीत रहा है। सब बदल जाएगा।

बचपन की यादें

बचपन का फ्लैशबैक जब दादी खाना खिलाती हैं, वो सबसे प्यारा पल था। गाँव का गौरव में परिवार का प्यार मुख्य विषय है। अब बड़ा होकर पोता उनकी देखभाल करना चाहता है। पैसों की गड्डी देखकर दादी की आँखें नम हो गईं। यह त्याग की कहानी है। चम्मच से खाना खिलाना यादगार था। बचपन की यादें ताजा हुईं। प्यार अमर है।

अंधेरे का संकेत

अंत में लाइट बंद करना बहुत प्रतीकात्मक था। जैसे कोई अध्याय खत्म हुआ हो। गाँव का गौरव का यह एपिसोड दिल को छू गया। पोते के चेहरे पर जिम्मेदारी का बोझ साफ दिख रहा था। दादी चुपचाप सब समझ रही हैं। खामोशी में भी शोर था। कमरा अंधेरा हो गया पर कहानी जारी है। रात लंबी है। सुबह होगी।

सेट डिजाइन की तारीफ

दीवारों का पुराना पेंट और कैलेंडर समय को दर्शाते हैं। गाँव का गौरव की सेट डिजाइन बहुत असली लगती है। पोते की मांसपेशियां और मेहनत साफ झलकती है। वह शहर से कुछ लेकर आया है। दादी की झुर्रियों में सालों की कहानी लिखी है। बहुत सुंदर कलाकारी। मिट्टी की खुशबू आती है। घर पुराना है। यादें ताजा हैं।

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