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गाँव का गौरववां55एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

आँखों का दर्द

ग्रे सूट वाले की आँखों में दर्द साफ़ दिख रहा है। उसे इस तरह घुटनों पर देखना दिल को तोड़ देता है। काले जैकेट वाले का गुस्सा बहुत खतरनाक लग रहा है। गाँव का गौरव नाटक में भावनात्मक पल बहुत गहरे हैं। ईंटों वाले घरों का माहौल संघर्ष को और असली बनाता है। यह दृश्य देखकर रूह कांप जाती है। सबकी चुप्पी शोर मचा रही है।

माँ का डर

गर्भवती के आँसू बहुत असली लग रहे हैं। वह किसी को बचाने की कोशिश कर रही हैं पर असहाय हैं। खड़े हुए दो लोगों के बीच तनाव महसूस किया जा सकता है। गाँव का गौरव में परिवार की इज्जत का बोझ दिखाया गया है। पृष्ठभूमि का संगीत ने उदासी को और बढ़ा दिया है। सबकी सांसें रुकी हुई हैं। कोई हिल नहीं रहा है।

खामोश तूफान

जब ग्रे शर्ट वाले ने घुटनों वाले को घूरा, तो हवा थम गई। तूफान से पहले की खामोशी ऐसी ही होती है। काले जैकेट वाला नेता सारी ताकत अपने पास रखता है। गाँव का गौरव में ताकत के समीकरण कच्चे दिखाए गए हैं। ईंटों का आंगन उनके लिए पिंजरे जैसा लग रहा है। हर कोई डरा हुआ है। नज़रें नहीं मिल रही हैं।

क्रूर सजा

मुंह से खून देखकर झटका लगा। जो लात मारी गई वह बहुत क्रूर और ठंडी थी। सब लोग डर के मारे जमे हुए खड़े थे। गाँव का गौरव में दिखाया गया है कि परंपरा कितनी क्रूर हो सकती है। अभिनय बहुत बेहतरीन है, खासकर दर्द के भाव। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। दर्द आँखों में साफ़ है।

समुदाय की चुप्पी

चुपचाप देखने वाले गाँव वालों ने दबाव बढ़ा दिया है। कोई भी अधिकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा। लाल पोशाक वाली चिंतित लग रही हैं पर पीछे हैं। गाँव का गौरव में समुदाय का दबाव अच्छे से दिखाया गया है। ऐसा लग रहा है जैसे खुले आम सजा दी जा रही हो। सबकी नज़रें वहीं हैं। कोई आवाज़ नहीं है।

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