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गाँव का गौरववां35एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से का असली चेहरा

इस नाटक में गुस्सा साफ दिखता है। जब पैसे चेहरे पर फेंके गए तो लगा दिल टूट गया। धूसर कमीज वाले किरदार की आँखों में दर्द साफ झलक रहा था। गाँव का गौरव ने ऐसे परिवारिक क्लेश को बहुत अच्छे से दिखाया है। मेज उलटने का दृश्य बहुत नाटकीय था लेकिन जरूरी भी था। सब कुछ बिखर गया जैसे उनका रिश्ता। देखकर लगता है कि इज्जत पैसों से बड़ी होती है। यह कहानी दिल को छू लेती है।

दादी का प्यार

लाल वस्त्र वाली महिला चुपचाप सब देख रही थी। उसकी आँखों में चिंता साफ दिख रही थी। जब खाना हवा में उड़ा तो सब हैरान रह गए। गाँव का गौरव की कहानी में हर किरदार का अपना वजन है। बूढ़ी दादी का प्यार सबसे ताकतवर हथियार है। उन्होंने उसे पीठ पर उठाकर सबको जवाब दे दिया। यह दृश्य बहुत भावुक कर देने वाला था। मुझे यह शो बहुत पसंद आया।

घमंड की हार

कोट वाली पोशाक वाले व्यक्ति का घमंड टूटता हुआ दिखा। पैसे दिखाना इज्जत नहीं खरीद सकता। धूसर कमीज वाले ने साबित किया कि गुस्सा भी जरूरी है। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ बार बार देखने को मिलते हैं। टूटे हुए बर्तन जैसे टूटे हुए सपने लग रहे थे। जमीन पर बिखरा खाना देखकर बुरा लगा। लेकिन अंत में मिली राहत ने सब ठीक कर दिया। यह एक बेहतरीन कहानी है।

खामोशी की ताकत

दादी माँ का चेहरा देखकर लगता है सब जानती हैं। उन्होंने बिना कुछ कहे सब संभाल लिया। जब वह उसे उठाकर ले गईं तो आँखें नम हो गईं। गाँव का गौरव ने रिश्तों की अहमियत बताई है। शोर शराबे के बीच चुप्पी सबसे तेज थी। सब लोग भाग रहे थे बस वही खड़ी रहीं। यह किरदार निभाने वाली अभिनेत्री बहुत अच्छी हैं। मुझे यह कड़ी बहुत याद रहेगी।

टूटी हुई मेज

झगड़े की शुरुआत बहुत साधारण लग रही थी। फिर अचानक सब कुछ बदल गया। गुस्से में इंसान क्या कर सकता है यह दिख गया। गाँव का गौरव की पटकथा बहुत मजबूत है। मेज उलटने की आवाज दिल पर लगी। सबके चेहरे के भाव बदल गए थे। कोई डरा हुआ था तो कोई गुस्से में था। यह असली जीवन जैसा लगता है। देखने वाला हर पल बंधा रहता है।

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