वीडियो की शुरुआत में भीड़भाड़ वाला बाजार दिखाया गया है जहाँ युवाकालीन बेटा अपनी नीली गाड़ी चला रहा है। यह दृश्य बहुत ही असली लगता है। जब वह घर पहुँचता है तो पिता की आँखों में आँसू देखकर दिल भर आया। गाँव का गौरव नामक इस शो में ऐसे ही जज्बात देखने को मिलते हैं। हर कोई अपने घर लौटना चाहता है। यह कहानी बहुत प्यारी है।
बुजुर्ग पिता का चेहरा जब दरवाजे से झांकता है तो हैरानी साफ झलकती है। फिर जब उसे एहसास होता है कि उसका बेटा लौट आया है तो वह रो पड़ते हैं। यह भावनात्मक पल बहुत सुंदर है। गाँव का गौरव की कहानी में परिवार का बंधन सबसे ऊपर है। माँ की दौड़ती हुई आती हुई भी देखने लायक है। सच्चा प्यार यही है। बहुत अच्छा लगा।
जब माँ दौड़ती हुई बाहर आती है तो उसकी खुशी देखते ही बनती है। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान सब कुछ कह जाती है। बेटे को देखकर उसका हैरान होना स्वाभाविक है। गाँव का गौरव में दिखाए गए इस रिश्ते ने मुझे बहुत प्रभावित किया। ग्रामीण जीवन की सादगी को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। मुझे यह बहुत पसंद आया।
युवा बेटा जब गाड़ी से उतरता है तो उसमें एक अलग ही आत्मविश्वास है। उसने मेहनत की है और अब अपने माता-पिता के पास लौटा है। पिता से हाथ मिलाते वक्त जो जुड़ाव दिखा है वह अनमोल है। गाँव का गौरव जैसे शो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाते हैं। यह दृश्य बहुत ही प्रेरणादायक लगा। सबको देखना चाहिए।
पिता की आँखों से बहते आँसू और फिर खुशी से की गई मुस्कान ने दिल जीत लिया। इतने समय बाद मिलने का दर्द और खुशी दोनों एक साथ दिखाई दिए। गाँव का गौरव की इस कहानी में हर पल में जान है। अभिनय बहुत ही स्वाभाविक लगा। ऐसा लगता है कि यह कोई नाटक नहीं बल्कि असली जीवन है। बहुत ही शानदार वीडियो है।