PreviousLater
Close

गाँव का गौरववां33एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

पेंडेंट का गिरना दिल दहला गया

जब वह पेंडेंट जमीन पर गिरा, तो मेरा दिल रुक गया। दादी माँ की आँखों में दर्द साफ दिख रहा था। परिवार के रिश्तों की यह जंग देखकर रोंगटे खड़े हो गए। गाँव का गौरव ने भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया है। सफेद कमीज वाले का घमंड बर्दाश्त से बाहर है। काश कोई उसे सबक सिखा दे। यह दृश्य बहुत ही भावुक था।

सफेद कमीज वाले से नफरत

सफेद कमीज वाला शख्स सिगरेट पीते हुए जिस तरह घूर रहा था, उससे नफरत हो गई। उसे लगता है वह सब कुछ खरीद सकता है, पर इज्जत नहीं। गाँव का गौरव की कहानी में यह किरदार बहुत नकारात्मक लगा। दादी माँ के साथ हुई बदसलूकी देखकर गुस्सा आ रहा है। उम्मीद है आगे चलकर इसकी करनी का बुरा नतीजा होगा। ऐसे विलेन को स्क्रीन पर देखना रोमांचक होता है।

हीरो की एंट्री धमाकेदार

ग्रे शर्ट वाला लड़का जब आगे आया, तो लगा हीरो आ गया। उसने बिना कुछ कहे दादी माँ का साथ दिया। यह चुप्पी ही सबसे बड़ी ताकत थी। गाँव का गौरव में ऐसे पल बहुत खास होते हैं। उसकी आँखों में गुस्सा और चिंता साफ झलक रही थी। बुजुर्गों का सम्मान करना ही असली मर्दंगी है। इस दृश्य ने मेरा दिल जीत लिया और मैं बस यही चाहता हूँ कि वह जीत जाए।

जेड का रहस्य क्या है

वह जेड का टुकड़ा सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि परिवार की विरासत है। जब बुजुर्ग दुकानदार ने उसे देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। गाँव का गौरव की पटकथा में यह मोड़ बहुत अहम है। असली और नकली के बीच की यह लड़ाई सिर्फ पैसे की नहीं, भरोसे की है। मुझे जानना है कि आखिर उस पेंडेंट में क्या राज छिपा है जो सबको हैरान कर रहा है।

दादी माँ के आंसू

दादी माँ के रोने का दृश्य देखकर मैं भी रो पड़ा। उनकी आँखों में बेबसी थी। गाँव का गौरव ने बुजुर्गों की भावनाओं को बहुत बखूबी दिखाया है। परिवार में हो रहे कलह ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। काश सब लोग समझ पाते कि रिश्ते कीमती हैं, जेवर नहीं। यह सीरीज हमें बहुत कुछ सिखाती है और दिल को छू लेती है।

ग्रे सूट वाले की चाल

ग्रे सूट वाला शख्स किस तरफ है, यह समझना मुश्किल है। वह कभी मदद करता है, कभी दुश्मन लगता है। गाँव का गौरव की कहानी में यह कन्फ्यूजन जानबूझकर बनाया गया है। उसकी बातों में एक चालाकी है जो खतरनाक हो सकती है। मुझे लगता है वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है और हर एपिसोड देखने पर मजबूर करती है।

आंगन का तनाव

आंगन का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। रंगीन झंडियां लगी थीं पर खुशी कहीं नहीं थी। गाँव का गौरव के सेट डिजाइन ने गाँव की असली तस्वीर पेश की है। मेज पर खाना रखा था पर किसी ने नहीं खाया। यह विरोधाभास बहुत गहरा था। परिवार के बीच की दूरियां साफ दिख रही थीं। ऐसे माहौल में कहानी आगे बढ़ती है तो मजा आता है।

लाल कपड़े वाली की चुप्पी

लाल कपड़े वाली की चुप्पी भी शोर मचा रही थी। वह सब देख रही थी पर कुछ बोल नहीं रही थी। गाँव का गौरव में हर किरदार की अपनी कहानी है। शायद वह भी किसी दबाव में है। उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था। परिवार के झगड़ों में अक्सर सबसे ज्यादा बहूएं ही पिस्तती हैं। यह पहलू बहुत ही वास्तविक और दर्दनाक लगा मुझे।

न्याय की उम्मीद

जब हीरो ने पेंडेंट उठाया, तो लगा न्याय हुआ है। उसने दादी माँ के आंसू पोंछे। गाँव का गौरव में ऐसे इमोशनल पल बहुत आते हैं। उसकी पकड़ में वह ताकत थी जो कमजोरों को सहारा देती है। यह दृश्य दिखाता है कि मुसीबत में कौन अपना होता है। मुझे ऐसे किरदार बहुत पसंद आते हैं जो सच के साथ खड़े होते हैं और झूठ का सामना करते हैं।

अगले एपिसोड का इंतजार

पूरी कहानी में एक रहस्य बना हुआ है। क्या वह जेड असली है या नकली? गाँव का गौरव के हर मोड़ पर नया सवाल खड़ा हो जाता है। सफेद कमीज वाले की हंसी में चालाकी थी। मुझे लगता है अंत में सबको सच का पता चलेगा। यह सस्पेंस बनाए रखना आसान नहीं है। दर्शक के रूप में मैं बस अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूँ और इंतजार नहीं कर सकता।