PreviousLater
Close

गाँव का गौरववां16एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे का बोझ या प्यार

जब उसने वह भारी बोरी खोली तो मेरी सांसें रुक गईं। इतनी मेहनत की कमाई देखकर दादी की आँखों में आँसू थे। यह सिर्फ नोट नहीं, बल्कि त्याग की गाथा है। गाँव का गौरव नामक इस कहानी ने दिल छू लिया। हर संघर्ष की कीमत होती है और यह पोता अपनी दादी के लिए सब कुछ झेल गया। सच्ची भावनाओं का बेहतरीन चित्रण। नेटशॉर्ट पर देखने का अनुभव शानदार रहा।

दादी का प्यार

बूढ़ी माँ के चेहरे पर झुर्रियां हैं पर मुस्कान में चमक है। जब पोता घुटनों पर बैठा तो लगा समय थम गया हो। गाँव का गौरव में दिखाया गया रिश्ता बहुत गहरा है। बाहर की दुनिया में संघर्ष करने वाले बेटे का लौटना किसी त्योहार से कम नहीं। हाथ के निशान बता रहे हैं कि रास्ता आसान नहीं था। दिल को छू लेने वाला सीन है।

संघर्ष के निशान

हाथ पर वो ताजा घाव देखकर रोंगटे खड़े हो गए। इतनी तकलीफ सहकर भी वह मुस्कुरा रहा था। गाँव का गौरव कहानी बताती है कि सफलता मुफ्त नहीं मिलती। अखबारों पर सोना और फिर घर आकर सब दे देना, यह त्याग है। दादी का हैरान होना स्वाभाविक था। ऐसे किरदार हमें प्रेरणा देते हैं। बहुत ही भावुक कर देने वाली लघु फिल्म है।

रात का सन्नाटा

खिड़की से चांदनी आ रही थी और कमरे में दीये की रोशनी। माहौल में एक अजीब सी शांति थी। गाँव का गौरव के इस दृश्य ने मन को शांत कर दिया। जब उसने बोरी खोली तो सन्नाटा टूट गया। पैसों की गड्डियां देखकर लगा कि मेहनत रंग लाई। दादी और पोते के बीच का संवाद बिना शब्दों के भी सब कह गया। खूबसूरत सिनेमेटोग्राफी है।

वापसी का पल

लंबे समय बाद घर लौटना और अपनों को खुश देखना सबसे बड़ा सुख है। इस वीडियो में वही जज्बात दिखाए गए हैं। गाँव का गौरव में परिवार की अहमियत को दिखाया गया है। बूढ़ी दादी का इंतजार और पोते की मेहनत दोनों बेमिसाल हैं। आँखों में आँसू और होठों पर मुस्कान देखकर दिल भर आया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे कंटेंट मिलना सुखद है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down