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गाँव का गौरववां47एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

दर्दनाक चीखें और आँसू

इस दृश्य में दर्द साफ झलकता है। सफेद कमीज वाला व्यक्ति जमीन पर गिड़गिड़ा रहा है जैसे उसकी दुनिया टूट गई हो। लाल पोशाक वाली का गुस्सा देखकर डर लग रहा है। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ आते हैं जो दिल दहला देते हैं। माहौल बहुत भारी है और हर कोई हैरान है। अभिनय बहुत असली लगा। आँसू और चीखें सब कुछ बता रही हैं। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी देखना बाकी है। दर्शक भी इसमें खो जाते हैं।

गुस्से का भयानक रूप

लाल पोशाक वाली ने थप्पड़ मारा तो सन्न रह गए। गुस्सा साफ दिख रहा था उसके चेहरे पर। सफेद कमीज वाले ने जब धक्का दिया तो सबकी सांसें रुक गईं। गाँव का गौरव की कहानी में नफरत और प्यार दोनों हैं। बुजुर्ग बीच में आई पर कोई फायदा नहीं हुआ। जमीन पर गिरना बहुत दर्दनाक लगा। परिवार के झगड़े बहुत गहरे लग रहे हैं। हर कोई अपने आप में खोया हुआ है। कोई सुलह नहीं दिख रही।

अंतिम विदाई का दुख

अंतिम संस्कार का माहौल बहुत उदास है। तस्वीर के सामने रोना किसी को भी रुला दे। सफेद कमीज वाले की आँखों में आँसू असली लग रहे थे। लाल पोशाक वाली ने जब पकड़ा तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है। गाँव का गौरव में भावनाओं की बाढ़ आ गई है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा ही अलग है। कहानी में बहुत गहराई है जो हर दृश्य में दिखती है। दर्शक भी इसमें खो जाते हैं। सबको लगा यह अंत है।

रिश्तों में दरार

झगड़ा बढ़ता गया और कोई नहीं रुका। सफेद कमीज वाले का गुस्सा अचानक बदल गया। लाल पोशाक वाली जमीन पर गिर गई तो बहुत बुरा लगा। गाँव का गौरव में ऐसे ड्रामा देखने को मिलते हैं। पीछे खड़ा व्यक्ति बस देखता रहा। यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। रिश्तों में दरारें साफ दिख रही हैं। कौन सही है और कौन गलत पता नहीं चल रहा। सब हैरान थे।

शानदार अभिनय कला

चेहरे के हावभाव बहुत शानदार हैं। रोने से पसीना आ गया था माथे पर। लाल पोशाक वाली की आँखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। गाँव का गौरव की एक्टिंग बहुत तारीफ के लायक है। मेज पर मोमबत्ती जल रही थी जो माहौल बना रही थी। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। हर एक्शन में जान थी। दर्शक भी सांस रोके देख रहे थे। यह कला बहुत ऊंची है।

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